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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 13 फ़रवरी को संयुक्त अरब अमीरात की दो दिवसीय यात्रा पर जाएंगे. यहां वह अबू धाबी में बीएपीएस मंदिर का उद्घाटन करेंगे.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 13 और 14 फ़रवरी को यूएई जाएंगे. बीते आठ महीनों में ये पीएम का तीसरा और 2015 के बाद से सातवां यूएई दौरा है,


पीएम मोदी यहां यूएई के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन ज़ाएद अल नाह्यान से मिलेंगे. विदेश मंत्रालय के अनुसार दोनों नेता इस दौरान भारत और यूएई के बीच रणनीतिक सहयोग को और मज़बूत करने पर बात करेंगे और एक जैसे हित वाले क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय मसलों पर चर्चा करेंगे.


मोदी इस दौरे पर शेख मोहम्मद बिन राशिद अल मख़तूम से भी मिलेंगे जो यूएई के उप-राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और रक्षामंत्री भी हैं. उनके न्योते पर ही प्रधानमंत्री मोदी दुबई में वर्ल्ड गवर्नमेंट समिट में गेस्ट ऑफ़ ऑनर होंगे और यहां एक ख़ास संबोधन भी देंगे.

यूएई के राजदूत अलशाली ने इंडियन एक्सप्रेस को ईमेल के ज़रिए दिए इंटरव्यू में कहा, "बीएपीएस हिंदू मंदिर के उद्घाटन के लिए पीएम मोदी के दौरे को यूएई एक ख़ास मौके के तौर पर देखता है, जो सहिष्णुता और स्वीकार्यता के मूल्यों के अनुरूप है, जो हमारे द्विपक्षीय रिश्तों का मार्गदर्शन करते हैं."


इस दौरे की प्रतीकात्मक अहमियत भी है. ये दोनों देशों के बीच मैत्रीपूर्ण संबंधों को दिखाता है."

उन्होंने कहा कि मंदिर के उद्घाटन के अलावा इस बात की उम्मीद है कि दोनों नेताओं के बीच मुलाक़ात "सकारात्मक और रचनात्मक" साबित होगी.



अबू धाबी में बने भव्य हिंदू मंदिर का निर्माण 2019 में शुरू हुआ था। यह 2022 में पूरा होने वाला था। हालांकि, कोरोना की महामारी के कारण निर्माण में देरी हुई। अब यह बनकर तैयार हो गया है। प्रधानमंत्री मोदी मंगलवार से संयुक्त अरब अमीरात की दो दिवसीय यात्रा करेंगे। इसी दौरान 14 फरवरी को वह विशाल मंदिर का उद्घाटन भी करने जाएंगे।


मंदिर का निर्माण भारतीय कारीगरों ने किया है। ये कारीगर पारंपरिक हिंदू मंदिर वास्तुकला में माहिर हैं। मंदिर का निर्माण हाथ से नक्काशीदार संगमरमर और बलुआ पत्थर से किया गया है। 2015 में प्रधानमंत्री मोदी की संयुक्त अरब अमीरात यात्रा के दौरान अबू धाबी ने दुबई-अबू धाबी राजमार्ग पर मंदिर परियोजना के लिए 17 एकड़ से ज्‍यादा भूमि आवंटित की थी। मंदिर की आधारशिला 2017 में पीएम मोदी ने रखी थी।


यह हिंदू मंदिर एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। पश्चिम एशिया में यह सबसे बड़ा मंदिर होगा। मीडिया रिपोर्टों से पता चलता है कि 700 करोड़ रुपये से बना यह मंदिर बहुत सावधानी से डिजाइन किया गया है। इसमें देश के प्रत्येक अमीरात का प्रतिनिधित्व करने वाली सात मीनारें हैं।


(रिपोर्टर)

युनुस खान भोपाल

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