इलेक्टोरल बॉन्ड, क्या है कब हुई थी शुरुआत; पढ़ें सुप्रीम कोर्ट ने क्यों लगाई इस पर रोक
सुप्रीम कोर्ट ने इलेक्टरल बॉन्ड्स यानी चुनावी बांड को असंवैधानिक बताते हुए रद्द कर दिया है कोर्ट ने इस मामले पर क्या कहा इलेक्टरल बॉन्ड्स क्या होते हैं और इससे पहले पॉलीटिकल पार्टी को कैसे फंड किया जाता था यह सब आपको आसान भाषा में बताते हैं साल 2018 में इलेक्टोरल बॉन्ड स्कीम को लागू किया गया था सरकार ने कहा था कि इससे पारदर्शिता बढ़ेगी पॉलिटिक्स में ब्लैक मनी आउट हो जाएगी चलिए समझते हैं क्या होते हैं इलेक्टरल बॉन्ड्स इलेक्टरल बॉन्ड्स के जरिए आप देश की किसी भी पॉलीटिकल पार्टी को चंदा दे सकते हैं इसके लिए आपको बॉन्ड्स खरीदना होता है यह बोंड आप केवल सरकारी बैंक स्टेट बैंक ऑफ़ इंडिया यानी एसबीआई से खरीद सकते हैं
यह बॉन्ड्स केवल आप सरकारी बैंक से यानी एसबीआई से ही खरीद सकते हैं किसी और बैंक के पास आपको इलेक्टोरल बॉन्ड्स नहीं मिलेंगे
इलेक्ट्रिकल बॉन्ड्स से यह भी सुविधा मिलती है कि किसने किस पार्टी को और कितना चंदा दिया है
यह सब गुप्त होता है पार्टी को भी पता नहीं चलता कि उसे किसने चंदा दिया है हालांकि एसबीआई को इसकी जानकारी होती है चुनाव आयोग या आम जनता इस बारे में नहीं जान सकते कि किस पार्टी को किसने कितना चंदा दिया है साथ ही यह बॉन्ड्स टैक्स के दायरे में नहीं आता है और ना ही इस पर किसी तरह का ब्याज दिया जाता है
और यह भी माना जाता है कि विपक्षी पार्टी को किसी ने ज्यादा चंदा दे दिया तो सत्ता पक्ष उसको परेशान कर सकती है और इसका उल्टा भी हो सकता है इसीलिए डोनर की जानकारी गुप्त रखने का फैसला लिया गया
आप समझते हैं कैसे खरीदे जाते हैं इलेक्ट्रिकल बॉन्ड्स
मान लीजिए आपको किसी पार्टी को 1000 का चंदा देना चाहते हैं इसके लिए आप एसबीआई की किसी भी शाखा पर जाकर बताएंगे कि फला पार्टी को ₹1000 डोनेट करना चाहते हैं इसके बाद आपको बैंक में ₹1000 जमा करने होंगे और इसके बदले आपको ₹1000 का बॉन्ड्स मिल जाएगा यह एक तरीके का दस्तावेज होता है यही दस्तावेज पॉलीटिकल पार्टी को भी मिलगा अब पार्टी को केवल 15 दिन का समय मिलेगा अगर पार्टी 15 दिन में बॉन्ड्स को भुना लेती है तो बैंक में आपका जमा पैसा ₹1000 है वह पार्टी के खाते में चला जाएगा अगर पार्टी 15 दिन में बॉन्ड्स को भुना नहीं पाई तो आपका पैसा प्राइम मिनिस्टर रिलीफ फंड को डोनेट कर दिया जाएगा अब जानते हैं कैसे जारी होता है इलेक्टोरल बॉन्ड
इलेक्टोरल बॉन्ड के तहत चंदे की रकम फिक्स होती है यह बंद 1000 10000 और 1 लाख 10 लाख एक करोड़ का ही मिलता है आप चाहे तो एक से ज्यादा बॉन्ड भी खरीद सकते हैं
किस पॉलीटिकल पार्टी को चंदा मिल सकता है देश की किसी भी राजनीतिक पार्टी को चंदा नहीं मिल सकता इलेक्टोरल बॉन्ड के जरिए केवल उन्हें पार्टी को चंदा मिल सकता है
जो रिप्रेजेंटेशन ऑफ़ पीपल्स एक्ट 1951 के तहत रजिस्टर्ड हो और उसे पार्टी को लोकसभा या विधानसभा चुनाव में काम से कम 1% वोट मिला
अब समझने इलेक्टोरल बॉन्ड स्कीम से पहले कैसे फंडिंग होती थी इससे पहले ₹20000 तक का कैश में चंदा देने वालों की जानकारी को गुप्त रखा जाता है ₹20000 को घटकर ₹2000 कर दिया यानी ₹2000 तक का कैश में अगर कोई चंदा देता है तो उसकी जानकारी गुप्त रखी जाती थी और उसके ऊपर का चंदा देने वालों की जानकारी
चुनाव आयोग को देनी होती थी
नमस्ते इलेक्ट्रिकल बॉन्ड स्कीम से पहले कैसे फंडिंग होती थी इससे पहले ₹20000 तक का कैश में चंदा देने वालों की जानकारी को गुप्त रखा जाता उससे ज्यादा चंदा देने वालों की जानकारी चुनाव आयोग को देनी होती थी मैं तत्कालीन वित्त मंत्री अरुण जेटली ने ₹20000 को घटकर ₹2000 कर दिया यानी ₹2000 तक का कैश में अगर कोई चंदा देता है तो उसकी जानकारी गुप्त रखी जाती थी और उससे ऊपर का झंडा देने वालों की जानकारी चुनाव आयोग के पास होती थी आम जनता के पास में लेकिन आप जो इलेक्ट्रोल बंद आए हैं उसमें हर किसी की जानकारी खुद है और चुनाव आयोग को भी यह जानकारी नहीं मिलती सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा अब इस पर आते इलेक्टरल बन स्कीम के लागू होते ही इसके खिलाफ कई सारी याचिकाएं कोर्ट में दाखिल कर दी गई याचिका कर्ताओं का यह मानना था कि पॉलीटिकल पार्टी को कौन कितना चंदा दे रहा है यह आम लोगों को मालूम होना चाहिए उन्होंने यह भी कहा कि गुप्त रूप से सरकार की पार्टी को चंदा देखकर लोग या कंपनी सरकार से इनडायरेक्ट फायदा ले सकते हैं उन्होंने यह भी कहा कि जो कंपनी घाटे में है वह भी चंदा दे सकती है ऐसा कंपनी के शेरहोल्डर्स को भी मालूम होना चाहिए कि उनकी कंपनी किस पार्टी को चंदा दे रहीइसी पर सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि चुनावी बांड योजना अनुच्छेद 19 एक एक तहत यानी फ्रीडम ऑफ एक्सप्रेशन का उल्लंघन करती है और संवैधानिक है और इसे जारी करने वाली बैंक तुरंत चुनावी बांड जारी करना बंद कर दे कोर्ट ने एसबीआई को यदि आदेश दे दिया 6 मार्च तक बैंक के पास इलेक्ट्रिकल फोन को लेकर जो भी जानकारी है वह सारी जानकारी चुनाव आयोग को दी जाए इसके बाद चुनाव आयोग उसे सार्वजनिक करें अब समझते हैं कि अब तक कितने इलेक्टोरल बॉन्ड जारी हुए हैं जब संसद ने कांग्रेस ने यही सवाल सरकार से पूछा तो सत्ता पक्ष की ओर से जवाब में बताया गया कि कल 165 98 हजार करोड़ के बॉन्ड अब तक जारी हुए इसमें से 50% से ज्यादा बॉन्ड बीजेपी को ही मिले हैं
साल 2019 में जब क्विंट में इलेक्टरल बॉन्ड को लेकर नए खुलासा किए था जिसमे बताया गया कि बॉन्ड पर एक सीक्रेट नंबर लिखा होता है जिस पार्टियों यह पता कर सकती है कि उन्हें किसने चंदा दिया है हमारे
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद एसबीआई ने जो रिपोर्ट पेश की है और उनमें जिन कंपनियों के नाम उजागर हुए हैं
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