क्या धरतीपुत्र किसान आतंकवादी है
भारतीय किसानों के साथ जो व्यवहार सरकार कर रही है उसे लगता है कि यह किसान नहीं आतंकवादी या देशद्रोही है
शंभू बॉर्डर पर किसान लगातार आगे बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं पुलिस और सुरक्षा एजेंसियां उन्हें रोकने के लिए टियर गैस और रबर बुलेट का इस्तेमाल कर रही है रबर बुलेट से घायल किसानों को तुरंत उनके साथी अस्पतालों में भर्ती कर रहे हैं
सरकार ने दिल्ली के आसपास लगे सभी रास्तों और हाईवे को बॉर्डर में तब्दील कर दिया है इतनी सुरक्षा तो चीन पाकिस्तान और म्यांमार जैसी बॉर्डर पर देखने को नहीं मिलतीदे
देश की सरहद पर जितनी एजेंसियां और जवान तैनाद होते हैं आज उतने ही दिल्ली के चारों तरफ देखे जा सकते हैं
पुलिस और किसान दोनों अपना कर्तव्य निभा रहे हैं पुलिस उन पर लाठी भांज रही है आंसू गैस के गले और रबर बुलेट का भी इस्तेमाल कर रही है
और किसान बीती रात को पुलिस के जवानों को लंगर बांट रहे थे वह बात अलग है कि उनमें से कई जवानों ने लंगर लेने से इनकार किया
यह देख पुलिस ने रात को ही शायद तैयारी करली सुबह होते ही किसानों पर लाठियां भंजना है
यह सब देखते हुए भी हमारा देश बिल्कुल खामोश है नेता या अभिनेता सब ने चुप्पी साध रखी है कई अभिनेता तो छोटी-छोटी बातों पर कई दिनो तक टेलिविजनों पर छाऐ रहते हैं पर आज वह खामोश है क्योंकि मामला किसानों के हक्का मांगने का है
मैं आपको याद दिला दूं यह वही किसान है जो धरती का सीना चीर कर हमारे लिए अनाज की उपज करता है चाहे कड़ाके की सर्दी हो या फिर तपती धूप हो या अधिक बारिश वह हमारे लिए हमेशा अनाज उगाता है और उन्ही किसानो की महिला हमारे देश के लिए जवानों को जन्म देती है जो आज सरहदों पर हमारे देश की रक्षा कर रहे हैं कोई भी पढ़े लिखे या बिजनेसमैन के बच्चे फौज में भर्ती नहीं होते ज्यादातर फौज में किसानों के बच्चे ही भर्ती होते हैं
जय जवान जय किसान का नारा हमारे ही भारत में होता है
(रिपोर्ट) युनुस खान भोपाल
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