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क्या शिवराज सिंह के कार्यकाल के घोटालों का होगा पर्दाफाश?

शिवराज सरकार के दौरान हुए घोटाले के पर्दाफाश होने की तैयारी शुरू हो गई क्या मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव नगर निगम के भ्रष्ट अधिकारियों पर नकल कसेंगे

भोपाल नगर निगम द्वारा संबल योजना में हुए घोटाले मैं जांच कर रही टीम पैसेंजर ट्रेन की तरह काम कर रही है सिग्नल मिलता है तो ट्रेन चल देती है अन्यथा वह एक ही स्टेशन पर रुक जाती है. मुख्यमंत्री डॉक्टर मोहन यादव का जैसे ही आदेश आया तो जांच टीम ने अपनी रफ्तार तेज कर दी पर जांच टीम भोपाल के 6 जोंन अधिकारियों के आसपास ही घूम रही है जबकि मामला भोपाल के 16 जोंनो का है 

नगर निगम के योजना प्रकोष्ठ में मृत्यु सहायता के रूप में दी जाने वाली राशि में लगभग दो करोड़ रुपए का घोटाला सामने आया था। इस मामले में योजना प्रकोष्ठ के सभी सात कम्प्यूटर आपरेटरों को हटा दिया गया था और तत्कालीन छह जोन अधिकारियों को नोटिस जारी किए गए थे। मामले में छह जोन की 118 ऐसी फाइलें पकड़ में आई थी, जिनमें गलत तरीके से भुगतान किया गया था।इसकी शिकायत एक महिला ने की थी।जिसके बाद मामले में महापौर मालती राय ने संज्ञान लेते हुए प्रकरणों की सूक्ष्मता से जांच कराने के निर्देश दिए थे।

नगर निगम अधिकारी अपने बाकी के 10 जोनल अधिकारियों को क्यों बचना चाहते हैं और सिर्फ 6 पर ही क्यों कार्रवाई चल रही है मामला 2 करोड़ के आसपास का बताया जा रहा है जबकि बारीकी से जांच की जाए तो इसमें यह रकम बढ़ भी सकती है


क्या है संबल योजना

राज्यों द्वारा एक योजना का गठन किया गया जिसे संबल योजना कहा जाता है संभल योजना में जिन मजदूरों के पास श्रम कार्ड होता है यदि किसी कारणवश या दुर्घटना में उनकी मृत्यु हो जाती है तो इस योजना के तहत मृतक के परिवार को 2 लाख से लेकर 4 लाख तक का मुआवजा देने का प्रावधान रखा गया

योजना का लाभ लेने के लिए आवश्यक दस्तावेज

संबल योजना का लाभ लेने के लिए कुछ दस्तावेजों की जरूरत होती है  जेसे श्रम या संभल कार्ड. समग्र आईडी. मृत्यु प्रमाण पत्र. आधार कार्ड. और बैंक का खाता. यह जरूरी दस्तावेज मृतक के परिवार के पास उपलब्ध होना चाहिए लाभ केवल मृतक के करीबी को ही दिया जाता था

कैसे हुआ यह घोटाला

ऊपर बताए गए दस्तावेज ही इस घोटाले का केंद्र बिंदु बने लाभार्थी कोई और था. पैसा किसी और को मिला. खाता किसी और का पैसा किसी और के खाते में गया.मृतक कोई और दस्तावेज किसी और के इसी आधार पर नगर निगम के अधिकारियों ने इस पूरे घोटाले को अंजाम दिया और करोड़ों रुपए डकार गए

नगर निगम का यह घोटाला कोई पहला मामला नहीं है इससे पहले भी साल 2008 9 में महिला विधवा पेंशन योजना जिसमें ₹10000 मिलते थे नगर निगम द्वारा इसमें भी बड़ा घोटाला किया गया था हालांकि कुछ अधिकारियों को सस्पेंड किया गया 


सरकारी योजनाओं का लाभ तो ऐसे ही अधिकारी उठाते हैं किसी भी योजना के आने पर जितनी खुशी जनता को नहीं होती जितनी ज्यादा खुशी इन अधिकारियों को होती है क्योंकि इन्हें पता है कि यह हमारे ही फायदे के लिए आई है

केंद्र और राज्य सरकार कई योजनाएं लाभार्थियों को देने के लिए निकलते हैं लेकिन बीच में बैठे यह बेचौलिए अधिकारी पैसा गरीबों तक पहुंचने ही नहीं देते

अब देखना यह है मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव इस पर क्या संज्ञान लेते हैं

( रिपोर्ट ) युनुस खान भोपाल 

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